सांबा। श्रावण मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर सांबा जिले की धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी छोटी काशी पुरमंडल में भव्य एवं दिव्य कावड़ यात्रा का आयोजन किया गया। कावड़ यात्रा के दूसरे वर्ष में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में शिवभक्त और कावड़िए पुरमंडल पहुंचे। पूरे दिन पुरमंडल की पवित्र धरा हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजती रही।
कावड़ यात्रा एवं मेले की समस्त व्यवस्थाएं पुरमंडल उत्तर वाहिनी तीर्थ सेवा न्यास की ओर से की गईं। न्यास द्वारा कावड़ियों के लिए कावड़ की व्यवस्था, महादेव नाम की टी-शर्ट, जलपान तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का इंतजाम किया गया। इसके अलावा देवक में कावड़ियों के स्नान और कुंड की व्यवस्था भी न्यास के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई।
दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे शिवभक्त
सुबह होते ही सांबा शहर, रामगढ़, त्रिंडियां, बुड़ौड़ी, देवन, पंचोली, खड़ा मैदान सहित जिले के विभिन्न गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से कावड़ियों का पुरमंडल पहुंचना शुरू हो गया। देखते ही देखते पुरमंडल में शिवभक्तों की भारी भीड़ जुट गई और पूरा क्षेत्र धार्मिक उत्साह से भर उठा।
पुरमंडल पहुंचने के बाद कावड़ियों ने सबसे पहले पवित्र जल में स्नान किया। इसके बाद उन्होंने ओमपति महादेव के दर्शन किए और अपनी कावड़ की विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान शिव के नाम का संकल्प लिया।
इस दौरान धार्मिक विधि-विधान के साथ महादेव की आरती की गई। मंत्रोच्चारण, घंटियों की गूंज और शिवभक्तों के जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
देविका से जल भरकर कावड़ियों ने शुरू की यात्रा
पूजा-अर्चना और संकल्प के बाद कावड़ियों ने देविका नदी के पवित्र जल को अपनी कावड़ में भरा और अपने-अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल कावड़ यात्रा पर निकले।
कई कावड़िए अपने शिवालयों तक पहुंचने के लिए 10, 30 और 40 किलोमीटर तक की पैदल यात्रा पर रवाना हुए। लंबी दूरी और रास्ते की कठिनाइयों के बावजूद श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। उनके कदमों में थकान के बजाय भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और भक्ति नजर आई।
न्यास की व्यवस्थाओं की श्रद्धालुओं ने की सराहना
कावड़ यात्रा के दौरान पुरमंडल उत्तर वाहिनी तीर्थ सेवा न्यास के कार्यकर्ता व्यवस्थाओं को संभालते नजर आए। कावड़ियों के लिए आवश्यक सामग्री, पेयजल, जलपान, स्नान और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर आयोजित इस भव्य कावड़ यात्रा ने पुरमंडल की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत किया। हजारों शिवभक्तों की मौजूदगी और दिनभर गूंजते हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारों ने पुरमंडल को पूरी तरह शिवमय बना दिया।
