आधुनिक तकनीक के दौर में पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को बचाना जरूरी: सतगुरु परमहंस

अखनूर, जम्मू: साहेब बंदगी के सतगुरु परमहंस ने रविवार को सुन्गल रोड, अखनूर में आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दौरान संगत को संबोधित करते हुए आधुनिक जीवनशैली, तकनीक के बढ़ते प्रभाव और समाज में तेजी से हो रहे सामाजिक एवं पारिवारिक बदलावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तकनीक ने मानव जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके अत्यधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल के कारण सामाजिक संबंधों, पारिवारिक मूल्यों और नई पीढ़ी के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

सतगुरु परमहंस ने कहा कि स्मार्टफोन और इंटरनेट अपने आप में उपयोगी साधन हैं, लेकिन जब इनका इस्तेमाल आवश्यकता से अधिक होने लगे तो यह व्यक्ति के सामाजिक जीवन और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर उन्होंने अभिभावकों को सजग रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आज बच्चे और युवा अपना काफी समय मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर व्यतीत कर रहे हैं। इसके कारण पारंपरिक खेलों, परिवार के साथ समय बिताने और समाज के अन्य लोगों से प्रत्यक्ष संवाद की प्रवृत्ति कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल जीवन को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए, न कि उसे सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों का विकल्प बना देना चाहिए।

पूर्वजों के जीवन से सीख लेने की जरूरत

सतगुरु परमहंस ने कहा कि हमारे पूर्वजों का सामाजिक जीवन प्रेम, ईमानदारी, सत्य, सेवा और अच्छे चरित्र जैसे मूल्यों पर आधारित था। संयुक्त परिवारों में लोग आपसी सहयोग, सम्मान और भाईचारे की भावना के साथ रहते थे। परिवार के बड़े-बुजुर्ग बच्चों को संस्कार और जीवन के मूल्यों की शिक्षा देते थे।

उन्होंने कहा कि पहले बच्चों का बचपन पारंपरिक खेलों और सामूहिक गतिविधियों के बीच गुजरता था। बच्चे अपने आसपास के लोगों के साथ मिलकर खेलते थे और इसी दौरान उनमें सहयोग, अनुशासन, आपसी सम्मान तथा सामाजिक व्यवहार जैसे गुण विकसित होते थे। आज इंटरनेट और स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल ने बच्चों की दिनचर्या और सामाजिक व्यवहार को काफी हद तक बदल दिया है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज को पूरी तरह अतीत में लौटने की आवश्यकता नहीं है। जरूरत इस बात की है कि अतीत के अच्छे संस्कारों और वर्तमान समय की उपयोगी तकनीकी उपलब्धियों के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।

तकनीक जरूरी, लेकिन निर्भरता चिंता का विषय

सतगुरु परमहंस ने कहा कि इंटरनेट और स्मार्ट तकनीक ने आम आदमी के जीवन को कई स्तरों पर आसान बनाया है। आज बैंकिंग, व्यापार, शिक्षा, संचार और परिवहन सहित अनेक व्यवस्थाएं इंटरनेट पर निर्भर हो चुकी हैं। ऐसे में तकनीक से दूरी बनाना व्यावहारिक समाधान नहीं है।

उन्होंने कहा कि समस्या तकनीक के इस्तेमाल में नहीं, बल्कि तकनीक पर पूरी तरह निर्भर हो जाने में है। मनुष्य को यह समझना होगा कि तकनीक उसके जीवन को सुविधाजनक बनाने का साधन है, न कि जीवन को नियंत्रित करने वाली शक्ति।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल पर ध्यान देने तथा उनके साथ पर्याप्त समय बिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल आधुनिक तकनीक का ज्ञान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना भी जरूरी है।

कमजोर पड़ रहे पारिवारिक रिश्तों पर जताई चिंता

सतगुरु परमहंस ने परिवारों में तेजी से आ रहे बदलावों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज कई परिवारों में माता-पिता के प्रति सम्मान, भाईचारे और आपसी सहयोग की भावना कमजोर होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान हमेशा से परिवार, संस्कार, सेवा, सम्मान और आपसी प्रेम रही है। यदि नई पीढ़ी इन मूल्यों से दूर होती गई तो इसका असर केवल परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे समाज की संरचना प्रभावित होगी।

उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार देने की जिम्मेदारी केवल स्कूल या किसी एक संस्था की नहीं है। परिवार, समाज और अभिभावकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि नई पीढ़ी आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और नैतिक जड़ों से भी जुड़ी रहे।

छल-कपट और अनैतिकता से बचने का संदेश

सतगुरु परमहंस ने समाज में बढ़ती छल-कपट और अनैतिकता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भौतिक प्रगति और तकनीकी विकास तभी सार्थक है जब उसके साथ मानवता, सत्य, ईमानदारी और अच्छे चरित्र जैसे गुण भी मजबूत हों।

उन्होंने संगत से आह्वान किया कि जीवन में आधुनिक साधनों का उपयोग करते हुए अपने मूल संस्कारों को न भूलें। परिवार में प्रेम, बड़ों का सम्मान, छोटों के प्रति स्नेह और जरूरतमंदों की सेवा जैसी परंपराओं को आगे बढ़ाना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझाने की जरूरत है कि आधुनिकता का अर्थ अपनी संस्कृति और मूल्यों को छोड़ देना नहीं है। आधुनिक तकनीक और पुराने अच्छे संस्कारों के बीच संतुलन बनाकर ही एक स्वस्थ और मजबूत समाज का निर्माण किया जा सकता है।

सत्संग के दौरान सतगुरु परमहंस के विचारों को संगत ने ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने अपने संबोधन में आध्यात्मिकता के साथ-साथ दैनिक जीवन में अच्छे आचरण, पारिवारिक प्रेम, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!