श्रीनगर: महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में जम्मू-कश्मीर के सेब उद्योग को शामिल न करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेब के आयात से स्थानीय बागवानों और किसानों को भारी नुकसान हो सकता है, जबकि वे पहले से ही विदेशी सेबों की प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब उद्योग की अहम भूमिका है और इससे करीब 7 लाख परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि सस्ते अमेरिकी सेब बाजार में आते हैं तो स्थानीय उत्पादकों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
विदेशी सेब से पहले ही प्रभावित हैं बागवान
मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी सेब उद्योग पहले से ईरानी सेब के आयात से प्रभावित है। अब यदि अमेरिका से बड़े पैमाने पर सेब आयात हुआ तो स्थानीय किसानों की आय और बाजार दोनों पर असर पड़ेगा।
किसानों के हित में तीन प्रमुख मांगें
महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से बागवानों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि—
• सेब उद्योग को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए
• विदेशी सेब पर 50% आयात शुल्क लगाया जाए
• सेब किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू किया जाए
• बागवानों को वित्तीय सहायता पैकेज दिया जाए
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कश्मीर का प्रमुख कृषि क्षेत्र गंभीर आर्थिक संकट में पड़ सकता है।
सेब उद्योग कश्मीर की रीढ़
विशेषज्ञों के अनुसार, कश्मीर का सेब उद्योग न केवल किसानों बल्कि ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और व्यापार से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार देता है। इसलिए किसी भी व्यापार नीति का सीधा असर घाटी की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
