श्रीनगर: सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर 23,000 पदों को आउटसोर्स करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के बेरोजगार युवाओं के साथ “बड़ा विश्वासघात” है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आदेश वापस नहीं लिया तो उसे युवाओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा।
शर्मा ने यह बयान शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में दिया। कार्यक्रम में विभिन्न दलों के कई कार्यकर्ता और जिला विकास परिषद (DDC) के पूर्व सदस्य भाजपा में शामिल हुए, जिसे पार्टी ने कश्मीर में अपनी बढ़ती पकड़ का संकेत बताया।
आउटसोर्सिंग पर सरकार घिरी
शर्मा ने आरोप लगाया कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाने के बजाय सरकार ने लगभग 23 हजार पदों को आउटसोर्स कर दिया है।उनका कहना था कि इससे गरीब और पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के सरकारी नौकरी पाने के सपने टूट गए हैं।उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए, अन्यथा युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखेगा।
युवाओं के भविष्य का मुद्दा
भाजपा नेता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी पहले ही गंभीर समस्या है और ऐसे फैसले स्थिति को और खराब करेंगे।उन्होंने दावा किया कि आउटसोर्सिंग से न तो स्थायी रोजगार मिलेगा और न ही युवाओं को सामाजिक सुरक्षा।
अनुच्छेद 370 पर भी हमला
शर्मा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को चुनौती देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 अब “इतिहास” बन चुका है और इस मुद्दे पर राजनीति करना बंद करना चाहिए।उन्होंने कहा कि विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान देना ही प्रदेश के हित में है।
भाजपा में शामिल हुए कई नेता
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।पार्टी नेताओं ने इसे कश्मीर में भाजपा के बढ़ते जनाधार और विश्वास का संकेत बताया।
