Kanpur से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। कचहरी की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान देने वाले प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने मौत से पहले दो पेज का सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उन्होंने अपने पारिवारिक दर्द और मानसिक पीड़ा का विस्तार से जिक्र किया।
कानपुर में प्रशिक्षु अधिवक्ता की आत्महत्या, सुसाइड नोट ने खोले दर्दनाक राज
सुसाइड नोट में प्रियांशु ने लिखा कि उनकी आखिरी इच्छा है कि जो भी इस नोट को देखे, वह इसे अंत तक जरूर पढ़े। उन्होंने अपने पिता राजेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बचपन से मिली डांट, उलाहने और अपमानजनक व्यवहार ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया।
पिता पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप, सुसाइड नोट में लिखी आखिरी इच्छा
नोट के अनुसार, पिता द्वारा निर्वस्त्र कर घर से निकालने की धमकी और लगातार मानसिक दबाव ने उनके जीवन को गहरे आघात में डाल दिया। प्रियांशु ने लिखा कि उनके और पिता के रिश्ते इतने खराब हो चुके थे कि उन्हें यह तक लिखना पड़ा—“ऐसे पिता भगवान किसी को न दे।”
सुसाइड नोट में उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि उनके पिता उनके शव को भी न छुएं। अंतिम पंक्तियों में उन्होंने लिखा—“पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो।”
यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और संवाद की कमी पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और सुसाइड नोट को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है।
यदि यह सुसाइड नोट प्रमाणित होता है, तो मामले में कानूनी और सामाजिक स्तर पर कई पहलुओं की जांच की जाएगी। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव किस हद तक किसी व्यक्ति को टूटने पर मजबूर कर सकते हैं।
