
तीर्थनगरी कटड़ा में माता वैष्णो देवी मंदिर के यात्रा मार्ग पर प्रस्तावित रोपवे परियोजना के विरोध में संघर्ष समिति द्वारा बुलाए गए बंद का व्यापक असर देखने को मिला। बाजार बंद रहे, परिवहन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ और यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
संघर्ष समिति ने बंद को सफल बनाने के लिए व्यापारियों, घोड़ा चालकों, पिट्ठू और पालकी संचालकों से सहयोग की अपील की थी। इन वर्गों का कहना है कि रोपवे शुरू होने से उनकी आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान में यात्रा मार्ग पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं पर ही उनका रोजगार निर्भर है।
•आजीविका बनाम विकास की बहस तेज
रोपवे परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर “विकास बनाम रोजगार” की बहस तेज हो गई है। विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि रोपवे बनने से पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटेगी, जिससे घोड़ा, पिट्ठू और पालकी सेवाओं से जुड़े हजारों परिवारों की आय प्रभावित हो सकती है। वहीं, समर्थकों का कहना है कि इससे बुजुर्ग, दिव्यांग और बीमार श्रद्धालुओं को सुरक्षित और तेज़ सुविधा मिलेगी।
•श्राइन बोर्ड ने बातचीत का दिया निमंत्रण
बढ़ते विवाद के बीच श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने संघर्ष समिति को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। बोर्ड का कहना है कि सभी पक्षों की चिंताओं को सुनकर ही आगे का रास्ता तय किया जाएगा, ताकि किसी वर्ग को नुकसान न हो।
•उपराज्यपाल का बयान
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी स्पष्ट किया कि रोपवे परियोजना पर सभी हितधारकों से संवाद के लिए बोर्ड तैयार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कटड़ा में होने वाली विकासात्मक पहलों से किसी की आजीविका पर आंच नहीं आने दी जाएगी।उपराज्यपाल ने कहा कि कटड़ा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां सुविधाओं का विस्तार समय की आवश्यकता है, लेकिन विकास और रोजगार—दोनों को साथ लेकर ही आगे बढ़ा जाएगा।
•श्रद्धालुओं को हुई परेशानी
बंद के कारण कटड़ा पहुंचे श्रद्धालुओं को होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं में असुविधा झेलनी पड़ी। कई श्रद्धालुओं को यात्रा कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और शांति बनाए रखने की अपील की।
•आगे क्या?
अब सभी की नजर श्राइन बोर्ड और संघर्ष समिति के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर है। उम्मीद जताई जा रही है कि संवाद के जरिए ऐसा समाधान निकलेगा, जिससे तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलें और स्थानीय लोगों के रोजगार भी सुरक्षित रहें।
