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मिश्रीवाला में आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दौरान साहिब बंदगी के सद्गुरु साहिब जी ने अपने आध्यात्मिक प्रवचनों से संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि यह संपूर्ण सृष्टि पंचतत्वों से बनी हुई है और इन तत्वों का मूल आधार शून्य है।
सद्गुरु साहिब जी ने समझाते हुए कहा कि पृथ्वी की उत्पत्ति जल से, जल की उत्पत्ति अग्नि से, अग्नि की उत्पत्ति वायु से और वायु की उत्पत्ति आकाश अर्थात शून्य से हुई है। इसी कारण धर्म शास्त्र निराकार को परमात्मा मानते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे तिलों में तेल और मेंहदी में लालिमा उसका सार होता है, उसी प्रकार मनुष्य के स्वांसों में आत्मा का सार समाया हुआ है। शास्त्रों के अनुसार जब आत्मा प्राणों को धारण करती है तो उसे जीव कहा जाता है। यही कारण है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो कहा जाता है कि उसके प्राण निकल गए।
सद्गुरु साहिब जी ने बताया कि शरीर के भीतर प्राण वायु का विशेष महत्व है, जिसे रानी वायु भी कहा जाता है और यह हृदय में निवास करती है। आत्मा प्राणों के माध्यम से पूरे शरीर में व्याप्त रहती है और इसी से शरीर संचालित होता है।
उन्होंने कहा कि यह स्थूल संसार पंचतत्वों और शून्य से बना है, लेकिन आत्मा शून्य से नहीं बनी। इस गूढ़ रहस्य को सबसे पहले संत कबीर साहिब ने संसार के सामने रखा और जीवों के कल्याण का मार्ग दिखाया।
सत्संग के अंत में संगत ने सद्गुरु साहिब जी के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और आध्यात्मिक ज्ञान से लाभान्वित हुए।
