जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला जब करीब 1 लाख डेली वेजर्स को नियमित (Regularise) करने से जुड़े एक निजी बिल को सरकार ने खारिज कर दिया। यह बिल विधायक वहीद परा द्वारा पेश किया गया था।
विधानसभा में बिल को लेकर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से इसे स्वीकार नहीं किया गया, जिसके बाद सदन में विपक्षी विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। कई सदस्यों ने सरकार के इस फैसले को हजारों डेली वेजर्स के साथ अन्याय बताया।
बिल पेश करने वाले विधायक वहीद परा ने सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम डेली वेजर्स के साथ “विश्वासघात” है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में वर्षों से काम कर रहे हजारों अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने की लंबे समय से मांग उठती रही है, लेकिन सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया।
वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि इस मुद्दे पर पहले से नीतिगत प्रक्रिया चल रही है और अलग से निजी बिल की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद सदन में इस मुद्दे को लेकर काफी देर तक हंगामा होता रहा।

डेली वेजर्स से जुड़े संगठनों ने भी सरकार के फैसले पर निराशा जताई है और कहा है कि वे अपने हकों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
